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करवा चौथ का आध्यात्मिक अर्थ: आत्मा और परमात्मा के मिलन का पर्व

29 अक्टूबर 20263 मिनट में पढ़ें
चंद्रमा के नीचे छलनी से देखती स्त्री, दीये और कमल के फूल
सांकेतिक चित्र

करवा चौथ का आध्यात्मिक अर्थ केवल पति की लंबी उम्र की कामना तक सीमित नहीं है। Self Awakening Mission Trust के अनुसार यह आत्मा और परमात्मा के अटूट संबंध का प्रतीक है और अद्वैत रूप बनने का पर्व है। इस वर्ष करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। आप सभी दिव्यात्माओं को हार्दिक शुभकामनाएं।

करवा चौथ कब है और परंपरा क्या है

करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। परंपरा में विवाहित स्त्रियां, विशेषकर उत्तर भारत में, दिनभर व्रत रखती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं।

'करवा' मिट्टी का वह पात्र है जिससे चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और 'चौथ' का अर्थ है चौथी तिथि। पूजा का शुभ समय और चंद्रोदय का सही समय आपके शहर के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थान का पंचांग देख लें।

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परमात्मा ही पति है: व्रत का भीतरी भाव

संजीव सर और Mission की दृष्टि में करवा चौथ का सार यह है कि परमात्मा ही पति है। जब कोई साधक इस भाव से व्रत करता है, तो कहा गया है कि बाहर के पति की रक्षा भी भगवान स्वयं करते हैं।

यानी व्रत का असली लक्ष्य अपने भीतर के परम से जुड़ना है। प्रेम जब इस ऊंचाई को छूता है, तो रिश्ते भी अधिक गहरे और शांत हो जाते हैं।

करवा और चौथ: तुरिया अवस्था का संकेत

Mission के अनुसार करवा आत्मा का प्रतीक है और चौथ चतुर्थ अवस्था का। हम सामान्यतः तीन अवस्थाओं में जीते हैं: जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति।

इन तीनों से परे चौथी अवस्था है तुरिया, जहां आत्मा परम में लीन हो जाती है। करवा चौथ हमें इसी अवस्था की याद दिलाता है।

छलनी से चंद्र दर्शन का अर्थ

छलनी हमारी इंद्रियों का प्रतीक है। हम संसार को इंद्रियों के जाल से ही देखते हैं। जब इस जाल के पार मन के चंद्रमा, यानी शुद्ध प्रेम, को देखा जाता है, तो अहंकार छन जाता है और केवल प्रेम बचता है।

परंपरा में स्त्रियां छलनी से चंद्रमा और फिर पति को देखती हैं। इस भाव से देखें तो यह शुद्ध दृष्टि से प्रेम को देखने का अभ्यास है।

निर्जल व्रत: भीतर की वासना का त्याग

निर्जल व्रत का अर्थ केवल बाहरी जल छोड़ना नहीं है। असली त्याग भीतर की वासना का है। जब मन भूख-प्यास और इच्छाओं से मुक्त होता है, तब प्रेम निःस्वार्थ बनता है।

व्रत के नियम अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार निभाएं। साथ ही ध्यान और प्रार्थना से मन को शांत रखने का प्रयास करें, यह अभ्यास आपके भाव को गहरा कर सकता है।

विश्व-प्रेम की प्रार्थना

Self Awakening Mission Trust की प्रार्थना है कि आपका प्रेम केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रहे, वह विश्व-प्रेम बन जाए। ॐ श्री परमहंसाय नमः। स्वान्त सुखाय बहुजन हिताय।

इस करवा चौथ पर थोड़ी देर शांत बैठकर ध्यान करें। हमारे साथ ध्यान में जुड़ें और Mission से जुड़े रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ 2026 में कब है?

करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को है। यह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी का पर्व है।

करवा चौथ का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

यह आत्मा और परमात्मा के अटूट संबंध का प्रतीक है। करवा आत्मा है और चौथ तुरिया, यानी चौथी अवस्था।

करवा चौथ में छलनी का क्या महत्व है?

आध्यात्मिक दृष्टि से छलनी हमारी इंद्रियां हैं। इनके पार शुद्ध प्रेम को देखने पर अहंकार छन जाता है।

निर्जल व्रत का गहरा अर्थ क्या है?

इसका अर्थ भीतर की वासना का त्याग है। तब प्रेम निःस्वार्थ हो जाता है।

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