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परमहंसों की लीला: सेवा और कुर्बानी
कैसी सेवा थी कि सतगुरु ने खुद सेवक को गले लगा लिया?
और कैसी कुर्बानी कि सेवक ने अपने शरीर को ही पुल बना दिया! सेवा, समर्पण और प्रेम की चरम सीमा की लीला, जहाँ सतगुरु सेवक पर रीझ जाते हैं।
इसके बाद सुनें: परमहंसों की लीला
रोज़ साथ बैठकर ध्यान करें
हर सुबह अमृत वेला में साधक Zoom पर एक साथ नाम जाप और ध्यान करते हैं। यह भी निःशुल्क है। समय और link