दिव्य अमृत धारा › 🪷 गुरु ध्यान
प्रेम पुकार (निमंत्रण)
जैसे मंदिर में आते हो, वैसे ही मेरे हृदय-मंदिर में भी आओ…
आत्मा अपने प्रियतम सतगुरु को बार-बार भीतर आने का निमंत्रण देती है: उनका चिट्टा चोला, मधुर मुस्कान, विशाल नेत्र और करुणा भरा मुखड़ा प्रेम से निहारते हुए। सुनते ही आँखें नम और हृदय कोमल हो जाता है।
इसके बाद सुनें: गुरु ध्यान
रोज़ साथ बैठकर ध्यान करें
हर सुबह अमृत वेला में साधक Zoom पर एक साथ नाम जाप और ध्यान करते हैं। यह भी निःशुल्क है। समय और link