Self Awakening Missionआत्म जागृति मिशन खोजें
भक्ति

ishwer ne sristi ki rachna kyon ki?

14 अगस्त 20232 मिनट में पढ़ें

ईश्वर जो सर्वव्यापी, निराकार है, निर्गुण और सीमा रहित है, उसने स्वयं को जानने के लिए कि मैं कैसा हूं? क्या गुण है मेरे जरा अलग अपना एक रूप बना कर तो देखूं, इसलिए मौज वश उन्होंने अपने निराकार स्वरूप से कई रूप पैदा किए। क्योंकि कोई खुद को नही देख सकता, खुद अकेला कोई कैसे अपने को देखेगा? नही ना, जैसे खुद को देखने के लिए हम दर्पण का इस्तेमाल करते हैं, तभी खुद से अलग होकर खुद को देख पाते हैं। इसलिए अपने से अलग अपने ही अनेक अंशों को परमात्मा ने जन्म दिया फिर, ताकि उनके द्वारा मैं खुद को जानूं कि मैं कैसा हूं? इसी प्रकार खेल खेलने के लिए उन्होंने लीला रची। खुद एक से अनेक हो गए क्योंकि कोई अकेला खेल नही खेल सकता। और फिर सबके ऊपर परमात्मा ने माया का परदा डाल दिया। माया अर्थात उनके मन में भ्रम पैदा किया कि मैं ईश्वर से अलग एक सत्ता हूं। और उसे लक्ष्य दिया संसार की भूल भुलैया अर्थात विकारों, वासनाओं, इच्छाओं, सुख, दुख में रहते हुए खुद की पहचान करो, कि मैं ही परमात्मा का अंश हूं, उससे अलग नही।

लेकिन सांसारिक माया इतनी लुभावनी है कि जीव उसमे अपने परम लक्ष्य आत्मज्ञान की प्राप्ति को भूल जाता है, और चौरासी के फेर बार बार जन्म लेता है और मरता है। तब जाकर एक मनुष्य योनि उसे प्राप्त होती है, जहां से वह परमात्मा से मिल सकता है, क्योंकि मनुष्य योनि ही दुर्लभ अवसर है, खुद को जानकर परमात्मा से एक होने का। मनुष्य योनि कर्म योनि है, जहां वह कर्म करके अपने कर्मबंधनों से मुक्त हो सकता है। बाकी सब भोग योनि है, जहां सिर्फ कर्मों के अच्छे बुरे फल आपको भोगने होते हैं। इसलिए इस महानतम अवसर का लाभ हमें उठाना चाहिए। इसके लिए परमात्मा ही सतगुरु रूप लेकर आते हैं और हमारे परम लक्ष्य की ओर ले जाते हैं। इसलिए समर्थ सतगुरु की शरण में जाकर खुद को सौंप देना है। वो दया के सागर हमे इस संसार के मायाजाल से मुक्त करा देते हैं, इसलिए जीवन में गुरु का होना जरूरी है।

भक्ति में और पढ़ें

सारे लेख

Satguru ki kripa aur Naam Jaap

🙏🏻 ॐ श्री परमहंसाय नमः🙏🏻 ✨ ॥ सतगुरु की कृपा और नाम-जप ॥ ✨ 🌿🍁सतगुरु की कृपा जीवन

11 अक्टूबर 20262 मिनट

श्री सच्चिदानंद धाम में शताब्दी जन्मोत्सव: नवीन मंदिर, 500-सीटर Meditation Hall और गौशाला का उद्घाटन

चांदपुर गाँव, 19–20 सितंबर 2026: श्री सच्चिदानंद धाम में श्री परमहंस सद्गुरु देव दाता दीनदयाल जी महाराज के 100वें जन्म दिवस के अवसर पर दो दिवसीय शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। देश-विदेश के विभिन्न स्थानों से आए लगभग…

11 अक्टूबर 20265 मिनट

शारदीय नवरात्रि 2026: तिथियां, घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व

ॐ श्री परमहंसाय नमः जय माता दी शारदीय नवरात्रि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का एक प्रमुख पर्व है, जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है। यह समय केवल पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन,…

11 अक्टूबर 20263 मिनट