Self Awakening Missionआत्म जागृति मिशन खोजें
जीवन

KYA HUM PARMATMA KO MAHSOOS KAR SAKTEY HAI?

9 अप्रैल 20246 मिनट में पढ़ें
https://www.youtube.com/live/jNDC6hcEz_o?si=SahPpBVXlufW2lEP

क्या हम परमात्मा को महसूस कर सकते है?

परमात्‍मा को सुनने और महसूस करने के ल‍िए वह मन चाहिए जो उन्‍हें समझने की चाहत रखता हो सभी मार्ग ईश्वर की ओर जाने वाले हैं, क्योंकि प्रत्येक वस्तु ईश्वर से निकली है और वह अवश्य ही उनमें ही वापस चली जाती है। इस सृष्टि की सभी रचनाओं में ईश्वर का सौंदर्य, उसका ही सत्य और उसका ही शिव रूप छिपा है।

चूंकि आत्मा , परमात्मा का अंश है तथा आत्मा एवं परमात्मा के बीच मे माया है अर्थात आत्मा के ऊपर माया का अधिकार है । तो जब बीच मे से माया हट जायेगी तब हमारी इन्द्रिय मन बुद्धि सब दिव्य हो जायेंगे तब हम आत्मा एवं परमात्मा का अनुभव कर सकेंगे।

🔻जिसने प्रेम को महसूस किया, उसे स्वत: ही परमात्मा की झलक मिल जाती है
प्रार्थना से भक्ति भाव का उदय होता है और भक्त और परमात्मा के बीच के आवरण फिरने लगते हैं। पूरी तरह अहंकार शून्य होकर भक्त केवल प्रभु की ही आकांक्षा करता है और तब प्रभु को आना ही पड़ता है।

कहते हैं कि एक बार अनेकानेक भौतिक उपलब्धियां हासिल कर चुका व्यक्ति एक बार भगवत्ता को उपलब्ध संत के पास पहुंचा और बोला कि मुङो परमात्मा को पाना है। मुङो परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग बता दीजिए। संत ने उसकी आंखों में गौर से झांका, तो उन्हें वहां सूक्ष्म अहंकार ही परमात्मा को भौतिक उपलब्धियों की तरह ही प्राप्त कर लेने की जिद करता नजर आया। उनका हृदय करुणा से भर उठा।

उन्होंने उससे पूछा तुमने कभी किसी से प्रेम किया है। नहीं, इसका मुझे वक्त ही नहीं मिला। मुङो तो बस परमात्मा तक पहुंचने का राज बता दीजिए। इस पर संत ने कहा कि याद करिए। स्त्री, पुरुष, पशु, पक्षी किसी को भी देखकर कभी हृदय में प्रेम की चाहत उठी हो। ‘‘नहीं। ऐसी बेकार चीजों के लिये मेरे पास वक्त नहीं। ’’ उसकी गर्व पूर्ण बात सुनकर संत को उस पर दया ही आई और वे निराश भाव से सिर हिलाकर बोले, ‘तब व्यर्थ है। परमात्मा से तुम्हारा मिलन कभी नहीं हो सकता। यह सुनकर वह व्यक्ति आश्चर्यचकित हुआ। संत ने स्पष्ट किया-‘प्रेम ही परमात्मा की अभिव्यक्ति है। जब भी तुम प्रेमपूर्ण भाव से देखते हो या कोई तुम्हारी ओर देखता है, तो उस पल में परमात्मा की अभिव्यक्ति ही होती है। यही प्रेम गहरा हो, तो समर्पण का उदय होता है। समर्पण से ऐसी प्रार्थना का जन्म होता है, जिसमें कोई मांग नहीं होती।

प्रार्थना से भक्ति भाव का उदय होता है और भक्त और परमात्मा के बीच के आवरण गिरने लगते हैं। पूरी तरह अहंकार शून्य होकर भक्त केवल प्रभु की ही आकांक्षा करता है और तब प्रभु को आना ही पड़ता है। तब परमात्मा और भक्त में कोई भेद नहीं रह जाता। इसलिए जिसने प्रेम को महसूस किया, उसे स्वत: ही परमात्मा की झलक मिल जाती है। तभी कोई भी पुरुष या स्त्री हमें आकर्षित भले ही कर ले किंतु सर्वगुण संपन्न नहीं नजर आता। चुपके से हमारा मन कह ही देता है कि अगर इसमें ऐसा होता तो और भी अच्छा होता। सर्वगुण सम्पन्न (सम्पूर्ण) केवल परमात्मा ही है, जिसे पाने के लिए हमें प्रेम रूपी द्वार को खोलना होगा और फिर आवश्यकता होगी प्रेम की गहराइयों में डूब जाने की। स्मरण रहे परमात्मा की ओर हम एक कदम चलें तो वह सौ कदम हमारी ओर चलता है।

🔻परमात्‍मा को सुनने और महसूस करने के ल‍िए वह मन चाहिए जो उन्‍हें समझने की चाहत रखता हो
सभी मार्ग ईश्वर की ओर जाने वाले हैं, क्योंकि प्रत्येक वस्तु ईश्वर से निकली है और वह अवश्य ही उनमें ही वापस चली जाती है। इस सृष्टि की सभी रचनाओं में ईश्वर का सौंदर्य, उसका ही सत्य और उसका ही शिव रूप छिपा है। ईश्वर की रचनाओं की आकर्षण शक्ति हमें उस सर्वोच्च सुख की प्राप्ति के लिए सतत आकर्षित करती है। ईश्वर का आकर्षण और उसमें समाहित होना ही वह परम सुख है जिसकी निरंतर खोज में हम अपने को व्यस्त रखते हैं। लेकिन होता है उलटा। हम सांसारिकता के चंगुल में फंसकर सर्वोच्च सुख से अपने को दूर रखते हैं। ओशो गीता के अपने प्रवचन में एक जगह कहते हैं, ‘जब भी विराट ईश्वर हमारे सामने आता है, हमारा क्षुद्र अहंकार बेचैन हो जाता है। हम मरे हुए ईश्वर को पूज सकते हैं, लेकिन जीवित ईश्वर की पहचान मुश्किल है।’

हमारी दिक्कत हमारी सोच की है। जहां भी कोई चीज श्रेष्ठता को छूती है, परम ऐश्वर्य को प्राप्त करती है, वहीं ईश्वर की झलक मिलनी शुरू हो जाती है। इस क्रम से समझा जा सकता है कि ईश्वर की चेतना पहले पत्थरों या निष्क्रिय खनिज पदार्थों में व्यक्त होती है। इसके बाद पेड़-पौधों में संवेदनशीलता के रूप में और उसके बाद पशु-पक्षी की जगत में आत्मचेतना के साथ प्रकट होती है। मानव में ईश्वर श्रेष्ठतम रूपों में अपनी चेतना, तर्क, जीवनशक्ति और विवेक के माध्यम से प्रकट होता है। लेकिन हम अपनी चेतना का उपयोग नहीं करते हैं, उतनी ऊंची आंख उठाकर देखने का प्रयास ही नहीं करते हैं। इसके लिए जरूरी है, अपनी दृष्टि बदली जाए।

https://youtu.be/QMyVl59XCJQ?si=GGZkv11lf2Kmt1m2

ईश्वर अनंत काल से एक मृदु स्वर में हर वस्तु को पुकार रहे हैं, अपने में विश्राम के लिए, उस सर्वोच्च सुख की अनुभूति के लिए। इसके लिए वे खिलते फूल, गंभीर पर्वत, सागर की लहरों, प्रफुल्ल पवन के माध्यम से आमंत्रण देते हैं। आध्यात्मिक संतों का कहना है कि जो सुन सकते हैं, वे आज भी यमुना तट पर कृष्ण की बांसुरी सुन सकते हैं। जो सुन सकते हैं, वे आज भी वृंदावन में राधा के गीत सुन सकते हैं। लेकिन वह मन चाहिए, वह कान चाहिए, रामकृष्ण का वह भाव चाहिए जो मूर्ति में मां काली का दर्शन करता है, लेकिन उनके परम ज्ञानी शिष्यों को भगवती का दर्शन नहीं हो पाता है। हमारी इंद्रियां मनुष्य की आत्मा को भौतिक सुख और बाहरी दुनिया की ओर खींच लाती है। मनुष्य सुख और आनंद की खोज वहां करता है, जहां उसे कभी भी अनंत सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती है। इसके लिए जरूरी है, अंतर यात्रा और सर्वोच्च सुख में खुद को समाहित करने की कला को निरंतर विकसित करना।

परमात्मा के सौंदर्य तो चहुंओर बिखरे पड़े हैं, पर हम अपने अंतर्मन की आंखें बंद किए हुए हैं। हमारा स्वभाव ऐसा हो गया है कि हम सौंदर्य को भी अपने स्वार्थ और हित की नजरों से देखते हैं। पानी के तेज बहाव की आवाज में भी मछलियों का गहराइयों में शरण लेना, शांत समुद्र को देखना, आकाश में तारों का जाल, हर पल एक नए तारे का पूर्व दिशा में चमकना जैसी घटनाएं हमारे मन पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ती है, तो मन को बदलने की जरूरत है। तब दृष्टि भी बदलेगी और प्रकृति की सभी रचनाओं में परमात्मा का सौंदर्य भी दिखेगा।

जीवन में और पढ़ें

सारे लेख

ओडिशा के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉस्टल में Self Awakening Mission का Student Development Program, 57 लोगों की सहभागिता

ओडिशा, 2 अक्टूबर 2026: Self Awakening Mission की ओर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस हॉस्टल में students और staff के लिए एक Student Development and Positive Affirmations Program आयोजित किया गया। Programme में 48 students और 9…

11 अक्टूबर 20264 मिनट

बहादुरपुर नारी ऊर्जा केंद्र में ‘स्माइलिंग योगी’ सत्र, महिलाओं को सकारात्मक जीवन और शुक्राना का संदेश

बहादुरपुर नारी ऊर्जा केंद्र में Smiling Yogi Session, महिलाओं के आत्मविकास और सकारात्मक सोच पर जोर बहादुरपुर, 9 अगस्त 2026: महिलाओं के आत्मविकास, सकारात्मक सोच और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Self…

14 अगस्त 20266 मिनट

Rashte kabhi khatm nahi hote (Motivational Story)

​हिमाचल के एक छोटे से गाँव में रहने वाले विक्रम का बचपन से एक ही सपना था—दुनिया की

8 जुलाई 20263 मिनट