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भक्ति

The lotus does not offer the mud as an excuse.

23 मार्च 20262 मिनट में पढ़ें

कीचड़ का बहाना कमल नहीं देता: परिस्थितियों से ऊपर उठने की कला
​अक्सर जब हम जीवन में असफल होते हैं या कठिनाइयों से घिरे होते हैं, तो हमारा सबसे पहला कदम होता है—दूसरों या परिस्थितियों पर दोष मढ़ना। हम कहते हैं कि हमें अच्छे अवसर नहीं मिले, हमारा परिवार साथ नहीं था, या माहौल खराब था। लेकिन कुदरत हमें ‘कमल’ के माध्यम से एक अद्भुत पाठ पढ़ाती है।

​1. प्रतिकूलता में अवसर
​कमल एक ऐसे वातावरण में जन्म लेता है जिसे दुनिया ‘गंदा’ मानती है। कीचड़ का काम है मैला करना, लेकिन कमल उस गंदगी से पोषण लेता है, न कि उसकी प्रकृति को अपनाता है। वह यह शिकायत नहीं करता कि उसके चारों ओर अंधकार और गंदगी है। वह बस अपनी ऊर्जा को खिलने में लगाता है।

​2. चुनाव आपका है
​कीचड़ और कमल एक ही जल में रहते हैं, लेकिन दोनों की पहचान अलग है। यह हमें सिखाता है कि आप कहाँ से आए हैं, यह आपके वश में नहीं हो सकता, लेकिन आप क्या बनेंगे, यह पूरी तरह आपके हाथ में है। * क्या आप कीचड़ बनकर दूसरों को गंदा करेंगे?
​या कमल बनकर समाज को अपनी सुगंध और सुंदरता देंगे?

​ 3. निष्कामता का प्रतीक
​कमल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह कीचड़ में रहकर भी उससे अछूता रहता है। उसके पत्तों पर पानी की एक बूंद भी नहीं ठहरती। महान लोग भी ऐसे ही होते हैं; वे संसार की बुराइयों के बीच रहते तो हैं, लेकिन उन बुराइयों को अपने भीतर प्रवेश नहीं करने देते।

​ निष्कर्ष
यदि हम अपनी असफलताओं के लिए परिस्थितियों को दोष दे रहे हैं, तो हमें एक बार तालाब की ओर जरूर देखना चाहिए। कमल हमें याद दिलाता है कि खिलने के लिए साफ पानी की नहीं, बल्कि भीतर की संकल्प शक्ति की जरूरत होती है। सफलता “बहाने” बनाने से नहीं, बल्कि “बाधाओं” को सीढ़ी बनाने से मिलती है।

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