दिव्य अमृत धारा › 🔥 अंतरमुखी भक्ति और विरह
प्रभु से मिलने की चाह (विरह)
मैं द्वार पर खड़ी हूँ, कोई मेरे प्रियतम को संदेश दे दे…
आत्मा की वह विरह-व्यथा जहाँ जीव सतगुरु के दर्शन के लिए तड़पता है। जिस हृदय में विरह की आग जलती है, उसी को मिलन का अमृत मिलता है। सुनकर दिल में एक ही प्रार्थना उठती है: हे मालिक, ऐसी प्यास दे दे।
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रोज़ साथ बैठकर ध्यान करें
हर सुबह अमृत वेला में साधक Zoom पर एक साथ नाम जाप और ध्यान करते हैं। यह भी निःशुल्क है। समय और link