दिव्य अमृत धारा › 🪷 गुरु ध्यान
प्रेम स्वरूप ध्यान
क्या इंसान खुद प्रेम का स्वरूप बन सकता है?
गुरु का प्रेम ऐसा भीतर उतरता है कि हर साँस, हर भाव और हर विचार प्रेम बन जाता है, मानो उनके करकमलों से प्रेम की धारा सीधे आत्मा में बह रही हो।
इसके बाद सुनें: गुरु ध्यान
रोज़ साथ बैठकर ध्यान करें
हर सुबह अमृत वेला में साधक Zoom पर एक साथ नाम जाप और ध्यान करते हैं। यह भी निःशुल्क है। समय और link