सच्चे अनुभव · अंत लगा, शुरुआत निकली
मैंने सोचा था यह मेरी ज़िंदगी का अंत है। पर वही एक नई यात्रा की शुरुआत थी।
गरिमा जी · जुड़ी हैं 8 साल से
- पहले
आठ साल पहले वे अपने जीवन के सबसे कठिन समय से गुज़र रही थीं। लगता था अब कुछ नहीं बचा।
- मोड़
उसी समय वे संजीव सरSanjiv Sir से जुड़ीं, और वहीं से उनकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई।
- आज
आज वे कहती हैं कि उनका जीवन ही एक आशीर्वाद है। उन्होंने देखा है कि जो रोता हुआ आता है, वह मुस्कुराता हुआ जाता है।
“जो रोता हुआ आता है, वह मुस्कुराता हुआ जाता है।”
गरिमा जी






