सच्चे अनुभव · टूटे जीवन से नई शुरुआत
कोरोना में घर, नौकरी, गाँव, परिवार… सब बिखर गया। बस बच्चे साथ थे।
मैथिली जी · जुड़ी हैं कोरोना के समय से
- पहले
वे एक टीचर थीं, सुंदर घर था, अच्छा परिवार था। कोरोना आया और सब ताश के पत्तों की तरह बिखर गया: नौकरी गई, गाँव छूटा, परिवार बिखर गया। बच्चों के सामने मज़बूत दिखना था, पर भीतर पूरा अँधेरा था।
- मोड़
उसी अकेलेपन में वीडियो देखते-देखते संजीव सरSanjiv Sir का एक वीडियो सामने आया। फिर रेकी सीखी, टीचरशिप ट्रेनिंग की, और ॐ श्री परमहंसाय नमः का जाप शुरू किया।
- आज
घर की समस्याएँ एक-एक करके सुलझने लगीं। जिनके पास स्कूल नहीं था, उन्होंने अनाथाश्रम और वृद्धाश्रम के बच्चों और बुज़ुर्गों को पढ़ाना शुरू किया। आज वे एक छोटे से गाँव में नारी ऊर्जा केंद्र की सेवा कर रही हैं।
“समझ में आया कि मेरा दुख तो कुछ भी नहीं है। यहाँ बहुत सारे दुख हैं। अब मेरा जीवन बदलने लगा।”
मैथिली जी






