सच्चे अनुभव · "मुझे कुछ नहीं आता" से सेवादार तक
मैं हमेशा कहती थी, मुझे तो कुछ आता ही नहीं… फिर ख़ुद से प्यार करना सीखा।
ऋचा अरोड़ा जी · दिल्ली
- पहले
जीवन में बहुत सारी चुनौतियाँ थीं। मन में यही रहता था कि मेरे बस का कुछ नहीं, और लोगों की मंज़ूरी ही सब कुछ लगती थी।
- मोड़
संजीव सरSanjiv Sir के वीडियो में अपने सवालों के जवाब मिलने लगे। थर्ड आई क्लास से जुड़ीं, फिर रेकी, भक्ति साधना और नाम जप की क्लास।
- आज
कॉलिंग सेवा और लंगर सेवा से जुड़ीं, बात करने में असर आया, अपनी छुपी क्षमताएँ पता चलीं। सबसे बड़ी सीख: अपनी अंतरात्मा की आवाज़ ही सच होती है।
“लोग जो कहते हैं वही सही नहीं होता। हमारी अंतरात्मा जो कहती है, वही सच होता है।”
ऋचा अरोड़ा जी






