ब्रह्मांड को धन्यवाद करने के लिए हृदय में कृतज्ञता का भाव होना चाहिए। हृदय से भाव ही परमात्मा को समर्पित होता है। प्रेम और समर्पण होना चाहिए और हृदय...
मोक्ष अर्थात् जीवन–मरण से मुक्त हो जाना। मोक्ष प्राप्ति का अर्थ है कि परमात्मा से अलग हुआ जीव फिर अपने उसी परमात्मा स्वरूप में लीन हो जाता है। जब...
✨✨✨✨✨✨✨✨बोलो जयकारा बोल मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय✨✨✨✨✨✨✨✨सत्संग की बड़ी सीख है खुद को सुधारना। स्वयं सुधार, अपने आपकी कमियों को दूर करना। सत्संग की शिक्षा सीख...
सच्चा “धर्म” तो यह है कि आत्मा पर जो मोह माया की मैल का आवरण चढ़ चुका है, उसे नाम की कमाई से धोकर “आत्मा” को परमात्मा से मिलाना...
प्रेम क्या हैं, प्रेम कि परिभाषा क्या हैं यह जानने के लिए श्री राधे कृष्ण से बेहतर कोई नहीं कौन समझ सकते हैं…प्रेम संसार का सबसे पवित्र बंधन है…पर...
जहाँ पर सत्संगी अपने अवगुणों को देख कर सुधारने की कोशिश करता है और उसकी कोशिश ही उसे एक दिन गुरमुख बना देती है।हमारा खुद का सुधरना भी किसी...
आवाज लगाए सदगुरुहां तुझको जगाए सदगुरुये मौका नहीं खोनानहीं सोना, नहीं सोनामुश्किल से मानुष तन पायासदगुरु जीवन में तेरे आयाचरणों में तू ध्यान लगा लेंभीतर अपने ज्योति जगा लेभरा...
जीव को चाहिये कि अपना मन सब तरफ से हटाकर मालिक के चरणों मे लगावे।जो कहे कि मुझे परमात्मा से मिलने की इच्छा है और सांसारिक मोह व इच्छाएँ...
गुरु वचनों को रखना संभाल के।एक एक वचन में गहरा राज है।।यदि संसार की हालत को गौर से देखा जाए तो प्रत्येक मानव प्राणी दुःखी, अशांत और कल्पनाग्रस्त नज़र...
