जैसे पुराने कपड़ों को त्यागकर मनुष्य दुसरे नये कपड़े पहनता है, ठीक वैसे ही एक शरीर के मृत्यु के बाद आत्मा दुसरा नया शरीर धारण करती है। लेकिन इसमें...
प्रारब्ध यानी पिछले कर्मफलों का आज़ के वर्तमान जीवन में कुछ अच्छा और कुछ बुरा जो परिणाम आया है वह। प्रारब्ध मतलब जो अच्छा या बुरा आज़ हम भोग...
शरीर मरता है, पर उसके भीतर का जीवात्मा नहीं मरता। शरीर के मृत्यु के बाद आत्मा या जीवात्मा शरीर से अलग होता है, फिर भी उसके भीतर एक छाया...
परिस्थितियां कभी भी एक जैसी नहीं रहतीं। परिस्थितियां आतीं और चली भी जाती है। और जीवन है तो परिस्थितियां तो आती रहेंगी। मनुष्य जीवन सुख और दुःख का, अनुकूलता...
कर्म का सिद्धांत कहता है कि कर्म अकाट्य है, इसे काटा या बदला नही जा सकता। इसलिए जो कर्म किए जा चुके हैं, वह कभी नही बदला जा सकता।...
क्या कभी लंबे समय से भूली हुई बातो या धारणाओं की अनुभूति आपको इस जन्म में महसूस होती है? उन बातो के कुछ अवशेष आपके मन में आते है?जी!...
हर इंसान भौतिक सुखों को चाहता है, ऐसा कोई व्यक्ति नही जिसे सांसारिक सुखों की चाह ना हो। क्योंकि संसार में आते ही माया का परदा जीव पर डाल...
परमात्मा की पूजा करते समय आंखों में आंसू आना यह उनके प्रति एक सच्चे समर्पित मन की निशानी है। परमात्मा के प्रति समर्पित मन के कारण उनके प्रति प्रेम-भाव...
समझ और विवेक के साथ परिस्थितियों के अनुसार खुद को थोड़ा बदल लेना सही होता है। परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं होती। परिस्थितियां बदलती रहती है। प्रकृति परिवर्तनशील है,...
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